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Monday, June 1, 2020

तारीखों में उलझा कैबिनेट विस्तार, इन 5 कारणों से फाइनल नहीं हो रही मंत्रियों की लिस्ट

भोपाल. शिवराज कैबिनेट के विस्तार को लेकर सियासी खींचतान जारी है। कैबिनेट विस्तार अब तारीखों में उलझा है। सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में 2 जून को कैबिनेट विस्तार हो सकता है। कैबिनेट में किसे जगह मिलेगी और किसे नहीं इसको लेकर अब अंतिम फैसला केन्द्रीय नेतृत्व को करना है। सीएम शिवराज सिंह चौहान 1 जून को दिल्ली का दौरा कर सकते हैं। हालांकि केन्द्रीय नेतृत्व ने शिवराज कैबिनेट के विस्तार को हरी झंडी दे दी है लेकिन किस नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा इसको लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
मंत्रिमंडल विस्तार के लिए हर दिननई तारीख सामने आ रही है लेकिन कैबिनेट विस्तार की सही तारीख क्या है इसको लेकर पेंच फंसा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि 31 मई तक नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि एक जून को मुख्यमंत्री दिल्ली जाएंगे और लौटने के बाद राजभवन जाकर राज्यपाल लालजी टंडन से नए मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने का आग्रह करेंगे।
1. सिधिया खेमे को एडजस्ट करना:-
ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद मध्यप्रदेश की सत्ता में फिर से भाजपा काबिज तो हो गई है। लेकिन शिवराज सिंह चौहान के सामने सबसे बड़ी मुश्किल है ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक नेताओं का पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सामंजस्य बैठाना। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के दो नेता तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत शिवराज कैबिनेट में मंत्री हैं। माना जा रहा है कि सिंधिया खेमे के अभी 8 नेताओं का मंत्री बनाया जाना तय है। ऐसे में भाजपा का समीकरण बिगड़ रहा है। मध्यप्रदेश में 34 मंत्री बन सकते हैं। गोविंद सिंह राजपूत के कैबिनेट में शामिल होने के कारण पार्टी के कई नेताओं की दावेदारी फंस रही है।
2. बड़े नेताओं की असहमति:-
चंबल-ग्वालियर में जहां पार्टी को 16 उपचुनाव का सामना करना है, वहां से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, अरविंद भदौरिया की कैबिनेट में एंट्री से असहमत हैं। ऐसे समीकरण कमोबेश हर संभाग में बन रहे हैं। कुछ जिलों में सियासी और जातीय समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इन सब मुद्दों पर संघ और भाजपा संगठन के नेताओं के साथ बातचीत कर ली है। जबलपुर में अशोक रोहाणी का नाम पार्टी ने बढ़ाया है, वहीं अजय विश्नोई की भी प्रबल दावेदारी है। शिवराज के करीबी नेताओं में शामिल रीवा से विधायक राजेन्द्र शुक्ल को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है। शिवराज, राजेन्द्र शुक्ल को फिर से मौका देना चाहते हैं तो संगठन वहां से गिरीश गौतम के नाम को आगे बढ़ा रहा है।
3 जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण:-
शिवराज कैबिनेट के विस्तार की एक बड़ी चुनौती है जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण। सागर जिले से पार्टी से 4 बड़े नेता दावेदार हैं। गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह और प्रदीप लारिया जबकि गोविंद सिंह राजपूत पहले ही मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में किस नेता को कैबिनेट में जगह दी जाए और किसे नहीं पार्टी के सामने मुश्किलें हैं। इंदौर से कई दावेदार हैं। फिलहाल इंदौर जिले से तुलसी सिलावट मंत्री हैं। तुसली सिलावट के अलावा ऊषा ठाकुर, रमेश मैंदोला और मालिनी गौड़ प्रमुख दावेदार हैं। रमेश मैंदोला, कैलाश विजयवर्गीय के करीबी हैं।
विंध्य क्षेत्र से राजेन्द्र शुक्ल के अलावा, केदार शुक्ला, गरीश मौतम, रामखेलावन पटेल और आदिवासी कुंवर सिंह टेकाम दावेदार हैं जबकि विंध्य क्षेत्र से मीना सिंह पहले ही कैबिनेट मंत्री हैं। वहीं, ग्वालियर-चंबल से नरोत्तम मिश्रा प्रदेश में मंत्री हैं। इनके अलावा यहां सिंधिया खेमे और भाजपा के कई नेता दावेदार हैं। सिंधिया खेमे से इमरती देवी, प्रद्युमन सिंह तोमर दावेदार हैं। जबकि भाजपा से यशोधरा राजे सिंधिया, अरविंद भदौरिया भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं ऐसे में पार्टी की मुश्किल ये है कि अगर इन सब को मंत्रिमंडल में जगह दी जाती है तो सरकार में कई जिलों को भागीदारी नहीं होगी ऐसे में पार्टी में विरोध बढ़ सकता है।
उपचुनाव:-
शिवराज कैबिनेट का विस्तार प्रदेश की 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को देखते हुए भी किया जाएगा। ज्योतिरादित्य सिंधिया उपचुनाव में पार्टी के चेहरे हो सकते हैं। ऐसे में सिंधिया खेमे को नाराज नहीं किया जा सकता है। सिंधिया खेमे के नेताओं को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी उपचुनाव में जाने की तैयारी कर रही है। लेकिन दावेदारों की संख्या अधिक होने के कारण पार्टी की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
मनपसंद विभाग:-
सूत्रों का कहना है कि शिवराज कैबिनेट के विस्तार की एक बड़ी समस्या है नेताओं द्वारा अपने-अपने पसंद का विभाग मांगना। कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने खेमे के नेताओं के लिए उनके पसंदीदा मंत्रालय का दवाब बना रहे हैं। वहीं, पार्टी के कई पुराने नेता एक फिर उस विभाग के लिए दावेदारी कर रहे हैं जो विभाग उनके पास पहले से था। ऐसे में किसे कौन सा विभाग दिया जाए यह भी शिवराज सिंह चौहान और संगठन के लिए एक बड़ी मुश्किल है। ऐसी कारण है कि अब ये माना जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान दिल्ली दौरा करने के बाद ही अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगे।