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Tuesday, May 26, 2020

प्रदेश की सभी रेत खदानें बंद, रेत के दाम हुए दो गुने

भोपाल। प्रदेशभर में रेत खदानें बंद होने से रेत के दाम आसमान छू रहे हैं। खदानों से चोरी-छिपे निकल रही रेत के व्यापारी मनमाने दाम वसूल रहे हैं। इस सीजन में 25 से 27 रुपये फीट बिकने वाली रेत वर्तमान में 52 से 60 रुपये फीट बिक रही है। यह लॉकडाउन नहीं, सिस्टम की नाकामी का असर है। दिसंबर 2019 में खदानें नीलाम करने के बाद भी सरकार समय से खनन शुरू नहीं करा पाई है। जिसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं।
राजधानी सहित प्रदेशभर में रेत महंगी हो गई है और यह स्थिति अगले छह माह रहने वाली है। क्योंकि बारिश के चलते 15 जून से खदानों से रेत का उत्खनन बंद हो जाएगा। ऐसे में बिचौलिए भंडारित रेत को मनमाने दाम पर बेचेंगे। वर्तमान में नर्मदा सहित अन्य नदियों से चोरी-छिपे रेत निकाली जा रही है।
यह रेत भंडारित भी हो रही है और बेची भी जा रही इसलिए व्यापारियों ने मनमाने दाम वसूलना शुरू कर दिया है। मार्च से 15 जून तक आमतौर पर सभी घाट खुले रहते हैं। ऐसे में रेत के दाम 25 रुपये फीट या उससे भी नीचे पहुंच जाते हैं। रास्ते में चैकिंग ज्यादा हो या घुमावदार रास्ते से लाना पड़े, तो दाम 27 रुपये फीट होते हैं, पर इस बार 700 फीट भरती का ट्रक 17,500 से 19 हजार की बजाय 32 और 34 हजार रुपये में आ रहा है।
वहीं खुली रेत (ट्राली या आटो से) 52 से 60 रुपये फीट तक बिक रही है। 34 जिलों के ठेकेदारों ने अनुबंध तक नहीं किया खनिज विभाग ने अगस्त 2019 से प्रदेश के 1450 रेत खदानों की नीलामी शुरू की थी। दिसंबर 2019 में 40 जिलों की खदानें नीलाम भी कर दी गईं, पर इनमें से एक भी खदान सरकार शुरू नहीं करा सकी। ठेकेदार अभी तक पर्यावरण और उत्खनन अनुमति ही नहीं ले पाए हैं।
हद तो यह है कि पांच महीनों में 34 जिलों में ठेकेदारों ने खनिज निगम से अनुबंध तक नहीं किया इसीलिए विभाग ने 30 मई तक अनुबंध करने वाले ठेकेदारों से उत्खनन के लिए छह माह अतिरिक्त देने का वादा किया है। पंचायत की खदानें भी बंद सरकार नई खदानें शुरू नहीं कर पाई। ठेकेदारों को पर्यावरण व उत्खनन अनुमति नहीं दे पाई और ग्राम पंचायतों की 450 खदानें मार्च से बंद कर दीं। कमल नाथ सरकार की खनिज नीति में यह प्रावधान था। इस निर्णय से समस्या को और विकराल बना दिया है।