अपने घर घर में बंद हो गये। आनलाइन कवि गोष्ठी संपन्न - TIMESNEWS

Breaking

TIMESNEWS

सच्चाई की कलम से

Thursday, April 23, 2020

अपने घर घर में बंद हो गये। आनलाइन कवि गोष्ठी संपन्न

करैरा, स्थानीय साहित्यकारों ने आनलाइन कवि गोष्ठी का आयोजन किया ।
आनलाइन कवि गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध गीतकार रामस्वरूप शर्मा उपस्थित थे तथा अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा की गईं।
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती का पूजन किया ।
 माँ सरस्वती की वंदना शशांक मिश्रा द्वारा प्रस्तुत की गई तथा एक शानदार गीत प्रस्तुत किया-
" असफलता कोई हार नहीं है
ये होती बेकार नहीं है
असफलता में छुपी जीत की बारी है,
हारा वो है जिसने हिम्मत हारी है ।"
कवि गोष्ठी में प्रमोद गुप्ता भारती ने बुंदेली कविता कक्का फौज में भर्ती हो गए सुनाकर खूब हंसाया तथा कोरोनावायरस से बचने की कविता सुनाई,
" हाथ धोइयो साबन सें
और मुंह पै बांधो पटका,
भूल करी तौ खा जै हौगे
कोरोना कौ झटका।"
डा. ओमप्रकाश दुबे ने व्यंग कविताओं से सभी का मन मोह लिया।
"अब तुम बूढ़े हो गये हो
कैसे कर पाओगे तीर्थ।"
 सतीश श्रीवास्तव ने अपनी कविता  से आज के माहौल की चिंता व्यक्त की ।
" रहियो घर में चाहे तुमखौं
मिलवै रूखौ सूखौ,
पास पड़ोसी रह न पावै
बीरन कोऊ भूखौ।  "
डॉ राजेन्द्र गुप्ता ने अपनी कविता कुछ प्रकार प्रस्तुत की,
रोज मरते हैं रोज जीते हैं,
जिंदगी में कहां सुभीते हैं।
कवि प्रदीप श्रीवास्तव ने अपने गीतों के माध्यम से खूब तालियां बटोरी,
"मेरे ख्वावों में रोज आते हैं,
मेरे प्राणों में गुनगुनाते हैं।"
करैरा के प्रसिद्ध गीतकार घनश्याम योगी ने जैसे ही अपना गीत आरंभ किया समूचे माहोल में तालियां गूंज उठी।
"सागर के पार कैसे जाऊं री सजनियां,
प्रीतम से कैसे मिल पाऊं री सजनियां।"
बेटियों पर हो रहे अत्याचार  विषय पर एक शानदार कविता से सौरभ तिवारी ने श्रोताओं की तालियां बटोरी।
गीतकार रामस्वरूप शर्मा ने अपने गीतों के माध्यम से समाज में व्याप्त महामारी के माहोल पर बात रखी,
"आज ऐसे प्रतिबंध हो गये,
अपने घर घर में बंद हो गये।"
सुभाष पाठक जिया ने जैसे ही अपनी ग़ज़लों की प्रस्तुती की
"वन में भी साथ रहें
हम महल में भी,
हो साथ यूं हमारा कि
रघुवर सिया का साथ।"
करैरा के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रभुदयाल शर्मा ने श्रेष्ठ रचना प्रस्तुत की
" जीवन है संघर्ष कठिन पथ
भवसागर का भैया,
बिना किए संघर्ष चले न
जीवन रथ का पहिया।"
वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने अपनी कविताओं से गोष्ठी को शीर्ष पर पहुंचाया।
संचालन प्रमोद गुप्ता भारती ने किया।