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Sunday, April 26, 2020

दतिया में है मां बगुलामुखी के प्रथम उपासक परशुराम का प्राचीन मंदिर

दतिया। मां बगुलामुखी के प्रथम उपासक भगवान परशुराम का प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश के दतिया के पीताम्बरा पीठ मंदिर परिसर में स्थित है। शास्त्र और शस्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम के इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1963 में स्वामी जी महाराज के सानिध्य में किया गया था। उसके बाद से ही हर साल परशुराम जन्मदिवस पर यहां तीन दिवसीय समारोह आयोजित किया जाता है। लॉकडाउन के चलते इस बार केवल पुजारी ही मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। स्वामी जी महाराज की देखरेख में मंदिर परिसर में विराजमान मां धूमावती मंदिर के समीप ही भगवान परशुराम के मंदिर की स्थापना कराई गई थी। मूर्ति जयपुर से आई थी। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से हर साल यहां तीन दिनी जन्मदिवस समारोह के पहले दिन भगवान परशुराम का अभिषेक, हवन यज्ञ और प्रवचन होते थे। इसके बाद गोष्ठियां होती थी और अंतिम दिन कन्यापूजन के साथ कार्यक्रम का समापन होता था। लॉकडाउन के चलते इस समय मंदिर को बंद रखा गया है। इस कारण पहली बार मंदिर के पुजारी ही भगवान परशुराम जी का अभिषेक कर पूजा अर्चना करेंगे।
बगुलामुखी के बड़े साधक थे, इसलिए कराया निर्माण:-
मंदिर के पुजारी अनिल शास्त्री बताते हैं कि भगवान परशुराम शिवभक्त रहे हैं, लेकिन मां बगुलामुखी की आराधना से उन्हें विभिन्न शक्तियां प्राप्त हुई हैं। इन शक्तियों का प्रयोग उन्होंने कुशासन के विरुद्घ और निर्बल एवं असहाय समाज की रक्षा के लिए किया। इसी कारण उनका मंदिर परिसर में मां धूमावती मंदिर के समीप ही बनाया गया है। पीताम्बरा मंदिर की स्थापना वर्ष 1935 में हुई थी। पहले यहां श्मशान हुआ करता था। यह शक्तिपीठ है और यहां पूजा करने से कई शक्तियां प्राप्त होती हैं इसलिए इस पीठ पर समाज के प्रभुत्वशाली लोग अकसर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर के पुस्तकालय में हैं परशुराम मंत्रों के ग्रंथ:-
जिस समय मंदिर की स्थापना कराई गई, उसी समय मंदिर परिसर में पुस्तकालय भी बनवाया गया था, जिसमें आज भी गुप्त मंत्र, परशुराम भगवान के विभिन्न मंत्रों के उच्चारण के ग्रंथ रखे हुए हैं। ये केवल साधकों के लिए ही हैं। परिसर में स्थापित संस्कृत स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी इन्हीं पुस्तकों से मंत्रों का उच्चारण करना सिखाया जाता है।
इस बार चल समारोह नहीं:-
दतिया में दो जगहों पर भगवान परशुराम जयंती मनाई जाती है। मां पीताम्बरा मंदिर और बम-बम महादेव मंदिर के समीप राधा बिहारी मंदिर में। ब्राह्मण समाज की ओर से चल समारोह भी निकाला जाता है लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते चल समारोह नहीं निकाला जाएगा। समाज के लोगों ने अपील की है कि वह इस बार सुबह के समय घर पर ही रहकर भगवान परशुराम जी की पूजा अर्चना करें और शाम को अपने घरों के बाहर दीपक जलाएं।