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Thursday, April 30, 2020

साहब यह सब हमारे अपने है इन्हे भी अपने घर जाना है, सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल कर प्रवासी मजदूर पहुंच रहे है उत्तर प्रदेश की सीमा पर

●झांसी शिवपुरी हाइवे ग्राम डगरवाहा के पास बॉर्डर पर सैकड़ों की तादात में रोजाना पहुंच रहे है गरीब और दिहाड़ी मजदूर
●घंटो इंतजार के बाद बड़े मुश्किल से मिलती है अंदर जाने की अनुमति

दिनारा/करैरा। लोकडॉन को 1 महीने से अधिक का समय बीत चुका है लॉक डाउन के कारण पूरे भारत में गरीब तबके के लिए हालत बुरे होते जा रहे हैं महाराष्ट्र गुजरात राजस्थान से गरीब और दिहाड़ी मजदूरों का पैदल पलायन निरंतर जारी है लोग सैकड़ों किलोमीटर तक दिन-रात पैदल चलने को मजबूर हैं सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे
इन प्रवासी मजदूरों को बस एक ही जुनून सवार है कि उन्हें अपने घर जाना है ना तो इनके पास खाने को कुछ है और ना ही पीने को पैदल चल चल कर इनके पैरों की खाल ने दम तोड़ दिया है चप्पल जूते भी अपना जवाब दे चुके घर जाने कि चाह में ना तो इन्हें अपना दर्द का एहसास होता है और ना ही यह पता कि वह कितने किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा के बाद जब यह प्रवासी मजदूर अपनी प्रदेश की सीमा पर पहुंचते हैं तो इनके साथ गैरों जैसा व्यवहार किया जाता है घंटों इंतजार के बाद इन्हें अंदर घुसने दिया जाता है किसी को कानपुर जाना है तो किसी को गोरखपुर किसी को बहराइच जाना है तो किसी को लखनऊ सब मजदूरों की अपनी एक पीड़ा ओर एक कहानी  है वह कहते हैं कि हमें कोई शौक नहीं है  सड़क पर चलने का मजबूरी के चलते दिन-रात सड़कों पर पैदल चल रहे हैं अब ना तो उनके पास पैसा बचा है और ना ही खाने-पीने की कोई व्यवस्था है बस आस है तो अपनी सरकार से साहब  हमें अपने घर पहुंचा दो हमारा स्वास्थ्य परीक्षण करके क्वॉरेंटाइन में रखो पर गैरों जैसा व्यवहार तो ना करो साहब हम आपके अपने हैं हमें तो अपनाइये
(साभार: वीरेन्द्र यादव दिनारा)