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Friday, April 24, 2020

ग्रीन जोन में मिली छूट का दुरुपयोग या यह नासमझी हमको कहीं लॉकडाउन-3 में न ले जाए

शिवपुरी। 20 अप्रैल को ग्रीन जोन में मिली छूट में लोगों ने जो फायदा उठाया उसने शायद उनकी आदत खराब कर दी है। लोगों ने लॉकडाउन की समाप्ति मानकर जो चहलकदमी की शुरुआत की है वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। इतने दिन लॉकडाउन में रह चुके लोगों को अभी भी समझाना पड़ रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग क्या है और लोगों से किस तरह दूरी बनाकर रखना है। हालत यह है कि लोग अभी भी सब्जी के लिए मंडी जाने का मोह नहीं छोड़ रहे हैं। शाम को खाना खाने के बाद गर्मियों की छुट्टी का आनंद लेते हुए झुंड बनाकर निकल पड़ते हैं, रात को मोहल्लों की मीटिंग होने लग जाती हैं और बच्चे रात्रिकालीन क्रिकेट का आनंद लेने लग जाते हैं। रात को शहर के कई मोहल्लों में सामाजिक सरोकार शुरू हो जाता है। कहीं लगता ही नहीं हम लॉकडाउन-2 में जी रहे हैं। यदि किसी को कोई समझाने का प्रयास करे तो वे उसी को समझा देते हैं कि हम तो मोहल्ले से बाहर जाते ही नहीं फिर हमें किसका डर। उन्हें कौन समझाए कि वे नहीं जाते है तो क्या हुआ, अन्य लोग तो जाते हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि या तो वे जानबूझकर यह दिखाना चाहते हैं कि उन्हें वायरस का कोई डर नहीं या वे नासमझ हैं। इन्हें नासमझ कहना ही ज्यादा उपयुक्त होगा। बस डर यह है कि इनकी नासमझी में कहीं हम सबको लॉकडाउन-2 का सफर लॉकडाउन—3 तक न करना पड़ जाए जिसकी आशंका ज्यादा दिखाई दे रही है।
खतरा अभी टला नहीं:-
यही स्थिति देश की भी दिखाई दे रही है। देश भर से जो खबरें आ रही हें वे ज्यादा उत्साहजनक नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार 27 अप्रैल को सुबह प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से इसी मामले पर फिर से चर्चा करने वाले हैं। वैसे भी आज या कल से रमजान का महीना शुरू हो रहा है जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग खत्म होने का खतरा महूसस किया जा रहा है। हालाकि राहत देने वाली खबर यह है कि देश भर के प्रमुख मुल्ला-मौलवियों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए अपने धर्मावलंबियो को सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखने और नमाज घर में ही अदा करने का संदेश दिया है। बावजूद इसके सरकार का चिंतित होना स्वाभाविक है। खबर है कि सरकार 3 मई के बाद अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन हटा सकती है। हालांकि सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उधर नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पाल ने कहा है कि भारत में कोरोना की वास्तविक परीक्षा जून-जुलाई में होगी। उनका स्पष्ट रूप से संकेत है कि कोरोना के खिलाफ भारत की जंग अभी खत्म नहीं हुई है। डॉक्टर पाल ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए लॉकडाउन हटाने का फैसला बेहद सोच समझकर लेना होगा क्योंकि ऐसा करने पर संक्रमण के फिर से फैलने का खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभूतपूर्व आर्थिक लागत और मुश्किल परिस्थितियों में लॉकडाउन से मिले लाभ को हम व्यर्थ जाने नहीं दे सकते।
इंतजार है लॉकडाउन के बाद की स्थिति का:-
एक बात साफ है कि लॉकडाउन घोषित करना जितना आसान था उतना आसान लॉकडाउन को खत्म करना नहीं है। लगभग 40 दिन के बाद यदि जनता को बाहर आने का मौका मिलेगा तो वैसा ही दृश्य दिखाई देगा जैसे कि स्कूल की छुट्टी की घंटी बजते ही बच्चे घर की ओर दौड लगाते हैं। सारे बंधन और नियम-कानून टूट जाएंगे और सारी डिस्टेंसिंग धरी की धरी रह जाएगी। इसलिए यह तो संभव ही नहीं है कि पूरा लॉकडाउन एक साथ खोला जाए। मामला चरणों में ही सामने आएगा। यही वजह है कि अभी से विभिन्न मंत्रालयों के अलावा राज्यों के साथ भी बेहतर तालमेल की कवायद शुरू कर दी गई है। मंत्रालयों ने भावी हालात के लिए रोडमेप बनाना शुरू कर दिया है। केंद्र ने राज्यों के साथ संपर्क साधा है ताकि इकानामी के लिए अहम समझे जाने वाले महत्वपूर्ण उद्योगों का कामकाज तेजी से सामान्य हो सके। यह भी तय किया जा रहा है कि एक बार कल-कारखाने चालू करने के बाद अगर फिर से आसपास के इलाकों में कोरोना रेड जोन होते हैं तो उस स्थिति में कामकाज बंद करने को लेकर क्या नियम होंगे इसे अभी से साफ करना होगा।